Friday, 27 May 2011

दिल में लेकिन ख़ला नहीं रखना


मुझको आदत है दिल दुखाने की
दोस्त   मेरे,  गिला   नहीं  रखना

मैं   भले   ही   करीब   ना   आऊँ 
फिर भी तुम फ़ासला नहीं रखना

वक़्त  है तंग  तुम तूफानों के 
पास  ये काफ़िला नहीं रखना

ख़ुशी-औ-ग़म की गिनतियों में कभी
क्या  मिला,  ना  मिला, नहीं  रखना 

दोस्त  रखना  क़रीब  या दुश्मन
पास कोई  दिलजला नहीं रखना

चाहे ख़ुशियाँ हों या के ग़म रखना
दिल में लेकिन  ख़ला नहीं रखना

1 comment:

  1. बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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